Wednesday, January 4, 2012

मैदान में बैठकर पहाड़ में वोट को नेताओं की गिद्ध दृष्टि

:::दृष्टिकोण:::
विषम भौगोलिक परिस्थिति। आवागमन के सीमित संसाधन। इसमें भी अधिकांश कच्ची व टूटी सड़कें। पेयजल की आधी-अधूरी व्यवस्था। रोजगार का कोई जरिया नहीं। सीढ़ीनुमा खेतों के लिए सिंचाई के बंदोबस्त कुछ भी नहीं। छह महीने तक की खेती से अनाज का भी इंतजाम न होना। अस्पतालों में चिकित्सक नहीं, विद्यालय व कालेजों में शिक्षक नहीं। उत्पाद के लिए बाजार नहीं। पलायन के चलते उजाड़ होते गांव। पेड़ विहीन होते जंगल। गायब होती लोक संस्कृति। लुप्त होती परंपरा।
तमाम तरह की अव्यवस्थाओं के बीच बसे छह जनपदों वाले कुमाऊं मंडल के पांच जनपद पर्वतीय क्षेत्र में हैं। 29 विधानसभा सीटों वाले क्षेत्र में आलम यह है कि जिन जनप्रतिनिधियों को वहां की जनता विकास के लिए वोट देकर चुनती है, जब नेताओं को सत्ता हासिल हो जाती है तो फिर उसी क्षेत्र के आम आदमी के बीच रहना पसंद नहीं करते। क्षेत्र का विकास हो या नहीं, इसकी परवाह तो क्षणिक होती है लेकिन अपने विकास के लिए पलायन कर जाते हैं। लंबे समय से जिस पलायन की पीड़ा से आम आदमी गुजर रहा है, नेता भी अपने 'विकासÓ के लिए जनता को पीठ दिखाकर चल दे रहे हैं। पहले जहां दिल्ली, लखनऊ पलायन होता था, लेकिन नौ नवंबर 2000 के बाद से दोहरा पलायन हो गया। विकास से कोसों दूर पर्वतीय क्षेत्र के ग्रामीण अब हल्द्वानी, देहरादून जैसे सुगम क्षेत्रों में रोजगार व अन्य सुविधाओं के चलते बस रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर जनपद मुख्यालय वाले नगर में पहुंच रहे हैं। अधिकांश जनप्रतिनिधियों ने विकास की लड़ाई के बजाय, धन कमाने के बाद शहरी क्षेत्रों की ऐशो-आराम की जिन्दगी तलाशी और निरीह जनता रोजगार के लिए शहरों की तरफ पलायन कर गयी। फिर से राज्य में तीसरे विधानसभा चुनाव की तैयारी हो रही है। पहाड़ पर रहने वाले नेता कहते हैं कि हल्द्वानी, अन्य शहरों व नगरों में आरामतलब हो चुके नेताओं की गिद्ध दृष्टि फिर से पर्वतीय क्षेत्रों की जनता को कथित हितैषी बनने के लिए लग गयी है। विषम परिस्थिति में रहने वालों को चुनाव की इस विषम स्थिति से उबरने के लिए नये सिरे से सोचना होगा।

7 comments:

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  2. public ka bhi nahii samaj aata bhai ji election aate hi bade bade dalo ki chakachaudh main kho jaate hain .....baad main jab pata chalta hai galti se galat aadmi ko jita diya tab tak phir der ho jaati hai.....

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  3. ganesh ji apne likha to badhia hai lekin vartman me visham paristhition me rahna kaun chahta hai...ap ya mai?

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  4. agreed joshi ji, bahut badiya likha hai

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Thanks